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Wednesday, May 3, 2017

तेरे मेहँदी लगे हाथों पे मेरा नाम लिखा है

तेरे मेहँदी लगे हाथों पे मेरा नाम लिखा है 
ज़रा से लफ्ज़ में कितना पैगाम लिखा है
यह तेरी शान के काबिल नहीं लकिन मजबूरी है 
तेरी मस्ती भरी आँखों को मैंने जाम लिखा है


मैं शायर हूँ ,मगर आगे न बढ़ पाया रिवायत से 
लबों को पंखुड़ी ,ज़ुल्फ़ों को मैंने शाम लिखा है
मुझे मौत आएगी जब भी ,तेरे पहलू में आएगी 
तेरे ग़म ने बहुत अच्छा मेरा अंजाम लिखा है
मेरी क़िस्मत मैं है एक दिन ग्रिफ्तार -ऐ -वफ़ा होना 
मेरे चेहरे पे तेरे प्यार का इलज़ाम लिखा है क़ातील

तन्हाई मेरे दिल में समाती चली गयी

तन्हाई मेरे दिल में समाती चली गयी 
किस्मत भी अपना खेल दिखाती चली गयी 

महकती फ़िज़ा की खुशबू में जो देखा तुम को 
बस याद उनकी आई और रुलाती चली गयी


शिकायत यह नहीं की , वो नाराज़ है हमसे 
मुस्कुराने का हक़ भी छीना , इस बात का ग़म है 

शिकायत यह नहीं की , दिल पे मेरे ज़ख्म दिया 
कराहने का हक़ भी छीना , बस इस बात का ग़म है