Monday, July 3, 2017

ये दिल किसी को पाना चाहता है

ये दिल किसी को पाना चाहता है,
और उसे अपना बनाना चाहता है,


खुद तो चाहता है ख़ुशी से धड़कना,
उसका दिल भी धड़काना चाहता है.


जो हँसी खो गई थी बरसों पहले कहीं,
फिर उसे लबों पर सजाना चाहता है,




तैयार है प्यार में साथ चलने के लिए,

उसके हर गम को अपनाना चाहता है.

मोहब्बत तो हो ही गई है अब तो पर,
अब उसी से ही ये छिपाना चाहता है,


ये दिल अब किसी को पाना चाहता है,
और उसे सिर्फ अपना बनाना चाहता है

Dil Ke Sagar Mein Lehre Uthaya Na Karo

दिल के सागर में लहरें उठाया ना करो,
ख्वाब बनकर नींद चुराया न करो,

बहुत चोट लगती है मेरे दिल को,
तुम ख़्वाबों में आ कर यु तड़पाया न करो.

चुपके से आकर इस दिल में उतर जाते हो,
सांसों में मेरी खुशबु बन के बिखर जाते हो,

कुछ यूँ चला है तेरे ‘इश्क’ का जादू,
सोते-जागते तुम ही तुम नज़र आते हो.



उनका हाल भी कुछ आप जैसा ही होगा,
आपका हाले दिल उन्हें भी महसूस होगा,

बेकरारी की आग में जो जल रहे हैं आप,
आपसे ज्यादा उन्हें इस जलन का एहसास होगा.

जो नजरो का हुआ मिलना लब तेरे भी मुस्कुराये थे,
ईश्क के हर जूर्म में मेरे तेरी मोहोब्बत के साये थे,

मेरी हर रात में सजनी तेरी सेजो के साये थे,
रात को ख्वाब में मेरे ख्वाब तेरे मिलने आये थे.

Wednesday, May 10, 2017

नज़र ने नज़र से मुलाक़ात कर ली

तेरी हर अदा मोहब्बत सी लगती है,
एक पल की जुदाई मुद्दत सी लगती है,

पहले नही सोचा था अब सोचने लगे है हम,
जिंदगी के हर लम्हों में तेरी ज़रूरत सी लगती है


नज़र ने नज़र से मुलाक़ात कर ली,
रहे दोनों खामोश पर बात करली,

मोहब्बत की फिजा को जब खुश पाया,
इन आंखों ने रो रो के बरसात कर ली

Friday, May 5, 2017

मत पूछ कि क्या हाल है मेरा तेरे पीछे

बाज़ीचा-ए-अतफ़ाल है दुनिया है मेरे आगे
होता है शब-ओ-रोज़ तमाशा मेरे आगे।

होता है निहाँ गर्द में सहरा मेरे होते
घिसता है जबीं ख़ाक पे दरिया मेरे आगे।



मत पूछ कि क्या हाल है मेरा तेरे पीछे
तू देख कि क्या रंग है तेरा मेरे आगे।

ईमान मुझे रोके है जो खींचे है मुझे कुफ़्र
काबा मेरे पीछे है कलीसा मेरे आगे।

गो हाथ को जुम्बिश नहीं आँखों में तो दम है
रहने दो अभी सागर-ओ-मीना मेरे आगे।

Wednesday, May 3, 2017

वो तो खुश्बू है हवाओं में बिखर जाएगा

वो तो खुश्बू है हवाओं में बिखर जाएगा 
मसला फूल का है फूल किधर जाएगा

हम तो समझे थे के एक ज़ख्म है , भर जाएगा 
क्या खबर थी के रग -ऐ -जान में उतर जाएगा


वो हवाओं की तरह खाना -बेजान फिरता है 
एक झौंका है जो आएगा गुज़र जाएगा

वो जब आएगा तो फिर उस की रफ़ाक़त के लिए 
मौसम -ऐ -गुल मेरे आँगन में ठहर जाएगा

आख़िर वो भी कहीं रेत पे बैठी होगी 
तेरा यह प्यार भी दरिया है उतर जाएगा

तेरे मेहँदी लगे हाथों पे मेरा नाम लिखा है

तेरे मेहँदी लगे हाथों पे मेरा नाम लिखा है 
ज़रा से लफ्ज़ में कितना पैगाम लिखा है
यह तेरी शान के काबिल नहीं लकिन मजबूरी है 
तेरी मस्ती भरी आँखों को मैंने जाम लिखा है


मैं शायर हूँ ,मगर आगे न बढ़ पाया रिवायत से 
लबों को पंखुड़ी ,ज़ुल्फ़ों को मैंने शाम लिखा है
मुझे मौत आएगी जब भी ,तेरे पहलू में आएगी 
तेरे ग़म ने बहुत अच्छा मेरा अंजाम लिखा है
मेरी क़िस्मत मैं है एक दिन ग्रिफ्तार -ऐ -वफ़ा होना 
मेरे चेहरे पे तेरे प्यार का इलज़ाम लिखा है क़ातील

कुछ सितारों की चमक नहीं जाती

कुछ सितारों की चमक नहीं जाती,
कुछ यादों की खनक नहीं जाती,

कुछ लोगों से होता है ऐसा रिश्ता,
कि दूर रहके भी उनकी महक नहीं जाती।


मेरी यादें, मेरा चेहरा, मेरी बातें रुलायेंगी,
हिज़्र के दौर में, गुज़री मुलाकातें रुलायेंगी,

दिन तो चलो तुम काट भी लोगे फसानों में,
जहाँ तन्हा रहोगे तुम, तुम्हें रातें रुलायेंगी।

तन्हाई मेरे दिल में समाती चली गयी

तन्हाई मेरे दिल में समाती चली गयी 
किस्मत भी अपना खेल दिखाती चली गयी 

महकती फ़िज़ा की खुशबू में जो देखा तुम को 
बस याद उनकी आई और रुलाती चली गयी


शिकायत यह नहीं की , वो नाराज़ है हमसे 
मुस्कुराने का हक़ भी छीना , इस बात का ग़म है 

शिकायत यह नहीं की , दिल पे मेरे ज़ख्म दिया 
कराहने का हक़ भी छीना , बस इस बात का ग़म है

मेरे बहते आंसुओ की कोई कदर नहीं

मेरे बहते आंसुओ की कोई कदर नहीं
क्यों इस तरह नजरो से गिरा देते हो

क्या यही मौसम पसंद है तुम्हे जो,
सर्द रातो में आंसुओ की बारिश करवा देते हो


आखिर क्यों मुझे तुम इतना दर्द देते हो
जब भी मन में आये क्यों रुला देते हो

निगाहें बेरुखी हैं और तीखे हैं लफ्ज़
ये कैसी मोहब्बत हैं जो तुम मुझसे करते हो

Monday, May 1, 2017

एक आख़िरी हसीन मुलाक़ात होगी

तुम आना मेरे जनाज़े मे
एक आख़िरी हसीन मुलाक़ात होगी

मेरे जिस्म मे बेशक मेरी जान ना होगी
मेरी जान मेरे जिस्म के पास तो होगी


हाथों में उसका हाथ था
दिल में उसकी तस्वीर

किये वादे थे साथ ज़िंदगी बिताने के
हाथो की लकीरो को कुछ और मंज़ूर था

Thursday, February 9, 2017

जो तेरे गुलाबी लब मेरे लबों को छू जायें

जो तेरे गुलाबी लब मेरे लबों को छू जायें,
मेरी रूह का मिलन तेरी रूह से हो जाये,

ज़माने की साज़िशों से बेपरवाह हो जायें,
मेरे ख्वाब कुछ देर तेरी बाहों में सो जायें,

मिटा कर फ़ासले हम प्यार में खो जायें,
आ कुछ पल के लिये एक-दूजे के हो जायें।
 
 
अब तो शाम-ओ-सहर मुझे रहता हैं बस खयाल तेरा
कुछ इस कदर दुआओ सा मिला हैं मुझे साथ तेरा,
 
की अब कोई शिकवा और शिकायत नही उस खुदा से
बस एक तुम्हे पाकर खुशियो से भर गया ये दामन मेरा

Wednesday, February 8, 2017

बस तेरे नाम से मेरा नाम जुडा रहे

बस तेरे नाम से मेरा नाम जुडा रहे,
इससे नहीं फर्क बेवफाई या वफा करे;

कुछ तो हो तेरे नाम का पास मेरे,
तेरे गम से ही बेशक मेरा दिल भरा रहे.


हर दर्द की दवा हो तुम,
आज तक जो मांगी मेरी एक लौटी दुआ हो तुम,

तुम्हे मिलने की तमन्ना नहीं उठती कभी,
क्यूंकि जो हर वक़्त साथ रहती है वो हवा हो तुम.

आज मुझे ये शाम सजाने की इजाज़त दे दो

आज मुझे ये बताने की इजाज़त दे दो,
आज मुझे ये शाम सजाने की इजाज़त दे दो,


अपने इश्क़ मे मुझे क़ैद कर लो,
आज जान तुम पर लूटाने की इजाज़त दे दो.



खुदा की रहमत में अर्जियाँ नहीं चलतीं,
दिलों के खेल में खुदगर्जियाँ नहीं चलतीं,


चल ही पड़े हैं तो ये जान लीजिए हुजुर,
इश्क़ की राह में मनमर्जियाँ नहीं चलतीं.

Tuesday, January 10, 2017

आज भी प्यार करता हूँ तुझसे

ओ सनम अब यूँ रूठकर न जाओ दूर हमसे,
कि अब आदत सी हो गई है तुम्हारी,

तुम जो न दिखो तो अब,
न सुबह होती न शाम होती हमारी.


आज भी प्यार करता हूँ तुझसे, 
ये नहीं कि कोई मिली ही नहीं, 

मिलीं तो बहुत तेरे बाद पर, 
तू किसी चेहरे में दिखीं ही नहीं.

तुम्हारी याद में जब मेरा दिल रोता है

तुम्हारी याद आने पर आँसू टूट जाते है
उन्हें मैं हथेलियों पर समेट लेता हूँ
और जो अटक जाते हैं होंटों पर

तो मैं समझ लेता हूँ कि वो तुम हो.
सुबह-सुबह ठंडी हवा का झोंका 
मुझे चुपके से आकर छूता है


और उसमें जो सबसे तेज़ झोंका हो 
तो मैं समझ लेता हूँ कि वो तुम हो.
बिछड़ने के बाद से ही तुम्हारी याद आती है 

तुम्हारी याद में जब मेरा दिल रोता है
रोते-रोते जो ज़ोर की हिचकी आती है
तो मैं समझ लेता हूँ कि वो तुम हो.

Friday, December 2, 2016

निगाहों में अपनी हर दिन बरसात ख़ामोशी से

कहने को कह गए कई बात ख़ामोशी से
कटते-कटते कट ही गई रात ख़ामोशी से,

न शोर-ए-हवा, न आवाज़-ए-बर्क़ कोई
निगाहों में अपनी हर दिन बरसात ख़ामोशी से.


शायद तुम्हें ख़बर न हो लेकिन यूँ भी
बयाँ होते हैं कई जज्बात ख़ामोशी से,

दिल की दुनिया भी कितनी ख़ामोश दुनिया है
किसी शाम हो गई इक वारदात ख़ामोशी से.

ना जाने क्या बात थी उनमे और हममे

आँखों में रहा दिल में उतर कर नहीं देखा,
कश्ती के मुसाफिर ने समंदर नहीं देखा,

पत्थर मुझे कहता है मेरा चाहने वाला
मैं मोम हूँ उसने मुझे छू कर नहीं देखा.


सारी उम्र आंखो मे एक सपना याद रहा,
सदियाँ बीत गयी पर वो लम्हा याद रहा,

ना जाने क्या बात थी उनमे और हममे,
सारी मेहफिल भुल गये बस वह चेहरा याद रहा.

ना जाने कब वो हसीन रात होगी

रोज साहिल से समंदर का नज़ारा न करो,
अपनी सूरत को शबो-रोज निहारा न करो,

आओ देखो मेरी नज़रों में उतर कर ख़ुद को,
आइना हूँ मैं तेरा मुझसे किनारा न करो.


तेरे हर ग़म को अपनी रूह में उतार लूँ,
ज़िन्दगी अपनी तेरी चाहत में संवार लूँ,

मुलाक़ात हो तुझसे कुछ इस तरह मेरी,
सारी उम्र बस एक मुलाक़ात में गुज़ार लूँ.

ज़रा साहिल पे आकर वो थोड़ा मुस्कुरा देती

हसीनों ने हसीन बन कर गुनाह किया,
औरों को तो क्या हमको भी तबाह किया,

पेश किया जब ग़ज़लों में हमने उनकी बेवफाई को,
औरों ने तो क्या उन्होंने भी वाह - वाह किया.


ज़रा साहिल पे आकर वो थोड़ा मुस्कुरा देती,
भंवर घबरा के खुद मुझ को किनारे पर लगा देता,

वो ना आती मगर इतना तो कह देती मैं आँऊगी,
सितारे, चाँद सारा आसमान राह में बिछा देता.

मुझे याद रखना तुम कहीं भुला ना देना

उनसे मिलने की जो सोचें अब वो ज़माना नहीं,
घर भी उनके कैसे जायें अब तो कोई बहाना नहीं,

मुझे याद रखना तुम कहीं भुला ना देना
माना कि बरसों से तेरी गली में आना-जाना नहीं.


एक मुद्दत से मेरे हाल से बेगाना है,
जाने ज़ालिम ने किस बात का बुरा माना है,

मैं जो ज़िद्दी हूँ तो वो भी कुछ कम नहीं,
मेरे कहने पर कहाँ उसने चले आना है.

Friday, November 18, 2016

कुछ इस तरह से वो मुस्कुराते हैं

कुछ इस तरह से वो मुस्कुराते हैं,
की परेशान लोग उन्हें देख खुश हो जाते हैं,

उनकी बातों का अजी क्या कहिये,
अलफ़ाज़ फूल बनकर होंठों से निकल आते हैं.


फ़िज़ाओं का मौसम जाने पर, बहारों का मौसम आया,
गुलाब से गुलाब का रंग तेरे गालों पे आया,

तेरे नैनों ने काली घटा का काजल लगाया,
जवानी जो तुम पर चढ़ी तो नशा मेरी आँखों में आया.

ना जाने कौन सा जादू है तेरी बाहों में

तेरी सादगी को निहारने का दिल करता है,
तमाम उम्र तेरे नाम करने को दिल करता है,

एक मुक़्क़मल शायरी है तू कुदरत की,
तुझे ग़ज़ल बना कर जुबां पर लाने को दिल करता है.


ना जाने कौन सा जादू है तेरी बाहों में,
शराब सा नशा है तेरी निगाहों में,

तेरी तलाश में तेरे मिलने की आस लिए,
दुआऐं मॉगता फिरता हूँ मैं दरगाहों में.

पत्थर की दुनिया जज़्बात नही समझती

पत्थर की दुनिया जज़्बात नही समझती,
दिल में क्या है वो बात नही समझती,

तन्हा तो चाँद भी सितारों के बीच में है,
पर चाँद का दर्द वो रात नही समझती.


रोने की सज़ा ना रुलाने की सज़ा है,
ये दर्द मोहब्बत को निभाने की सज़ा है,

हसते है तो आँखों से निकल आते है आंसु,
ये उस शख्स से दिल लगाने की सज़ा है.

आप अपने सर पर क्यूँ इलज़ाम लेते हो

चंद साँसे बची हैं आखिरी बार दीदार दे दो, 
झूठा ही सही एक बार मगर तुम प्यार दे दो, 

जिंदगी वीरान थी और मौत भी गुमनाम ना हो, 
मुझे गले लगा लो फिर मौत मुझे हजार दे दो.


हम अपनी मौत खुद मर जायेंगे सनम, 
आप अपने सर पर क्यूँ इलज़ाम लेते हो,

जालिम है दुनिया जीने न देगी आपको, 
आप क्यूँ अपने सर पर इलज़ाम लेते हो.

सफर वहीं तक है जहाँ तक तुम हो

आँखों में आंसुओं की लकीर बन गयी, 
जैसी चाहिए थी वैसी तकदीर बन गयी, 

हमने तो सिर्फ रेत में उंगलियाँ घुमाई थी, 
गौर से देखा तो आपकी तस्वीर बन गयी.


सफर वहीं तक है जहाँ तक तुम हो, 
नजर वहीं तक है जहाँ तक तुम हो, 

हजारों फूल देखे हैं इस गुलशन में मगर, 
खुशबू वहीं तक है जहाँ तक तुम हो.

Thursday, November 17, 2016

अपने महबूब को खुदा कर दिया

वो हमें भूल भी जायें तो कोई गम नहीं,
जाना उनका जान जाने से भी कम नहीं,


जाने कैसे ज़ख़्म दिए हैं उसने इस दिल को,
कि हर कोई कहता है कि इस दर्द की कोई मरहम नहीं.




अपना होगा तो सता के मरहम देगा,
जालिम होगा अपना बना के जख्म देगा,

समय से पहले पकती नहीं फसल,
अरे बहुत बरबादियां अभी मौसम देगा.

सुकून अपने दिलका मैंने खो दिया

सुकून अपने दिलका मैंने खो दिया,

खुद को तन्हाई के समंदर मे डुबो दिया,

जो थी मेरे कभी मुस्कराने की वजह,


आज उसकी कमी ने मेरी पलकों को भिगो दिया.


आप से दूर हो कर हम जायेंगे कहा,

आप जैसा दोस्त हम पाएंगे कहा,


दिल को कैसे भी संभाल लेंगे,


पर आँखों के आंसू हम छुपायेंगे कहा.

Saturday, November 5, 2016

इन आँखों को दीदार तुम्हारा मिल गया

अब ये भी नहीं ठीक कि हर दर्द मिटा दें, 
कुछ दर्द तो कलेजे से लगाने के लिए हैं,

यह इल्म का सौदा, ये रिसाले, ये किताबें, 
इक शख्स की यादों को भुलाने के लिए है.


मुझको फिर वही सुहाना नजारा मिल गया, 
इन आँखों को दीदार तुम्हारा मिल गया, 

अब किसी और की तमन्ना क्यूँ मैं करूँ, 
जब मुझे तुम्हारी बाहों का सहारा मिल गया.

जीने की ख्वाहिश में हर रोज़ मरते हैं

मेरी रूह में न समाती तो भूल जाता तुम्हे,
तुम इतना पास न आती तो भूल जाता तुम्हे,

यह कहते हुए मेरा ताल्लुक नहीं तुमसे कोई,
आँखों में आंसू न आते तो भूल जाता तुम्हे.


जीने की ख्वाहिश में हर रोज़ मरते हैं,
वो आये न आये हम इंतज़ार करते हैं,

झूठा ही सही मेरे यार का वादा है,
हम सच मान कर ऐतबार करते हैं.

मेरी हर साँस पर बस तेरा ही नाम है

मेरी एक खवाहिश है जो तुम हों,
मेरी एक चाहत है जो तुम हों,

एक ही मेरी दुआ एक ही मेरी फरियाद
बस एक ही मेरी मोहब्बत है जो तुम हों.

मेरी चाहते बढने लगी है,
मुझे तेरी जरूरत होने लगी है,

बस बाहों में आ जाओ मेरी
मुझे तुम से मोहब्बत होने लगी है.

Friday, November 4, 2016

दिल में अब यूँ तेरे भूले हुये ग़म आते हैं

कुछ इशारे थे जिन्हें दुनिया समझ बैठे थे हम;
उस निगाह-ए-आशना को क्या समझ बैठे थे हम;

रफ़्ता रफ़्ता ग़ैर अपनी ही नज़र में हो गये;
वाह री ग़फ़्लत तुझे अपना समझ बैठे थे हम;

होश की तौफ़ीक़ भी कब अहल-ए-दिल को हो सकी;
इश्क़ में अपने को दीवाना समझ बैठे थे हम;


बेनियाज़ी को तेरी पाया सरासर सोज़-ओ-दर्द;
तुझ को इक दुनिया से बेगाना समझ बैठे थे हम;

भूल बैठी वो निगाह-ए-नाज़ अहद-ए-दोस्ती;
उस को भी अपनी तबीयत का समझ बैठे थे हम;

हुस्न को इक हुस्न की समझे नहीं और ऐ 'फ़िराक़';
मेहरबाँ नामेहरबाँ क्या क्या समझ बैठे थे हम।

Friday, October 28, 2016

वो भी क्या दिन थे की हर वहम यकीं होता था

किस को क़ातिल मैं कहूँ किस को मसीहा समझूँ
सब यहां दोस्त ही बैठे हैं किसे क्या समझूँ

वो भी क्या दिन थे की हर वहम यकीं होता था
अब हक़ीक़त नज़र आए तो उसे क्या समझूँ


दिल जो टूटा तो कई हाथ दुआ को उठे
ऐसे माहौल में अब किस को पराया समझूँ

ज़ुल्म ये है कि है यक्ता तेरी बेगानारवी
लुत्फ़ ये है कि मैं अब तक तुझे अपना समझूँ

हम मुसाफिर सफ़र पे ही चलते रहे

वक़्त बदल गया पर बदली सिर्फ कहानी हे.
साथ मेरे ये खूबसूरत लम्हों की यादे पुरानी हे,
मत लगाओ मेरे ये दर्द भरे ज़ख्मो पे मलम,
मेरे पास सिर्फ उनकी बस यही एक निसानी हे.

वो सूरज की तरह आग उगलते रहे, 
हम मुसाफिर सफ़र पे ही चलते रहे, 
वो बीते वक़्त थे, उन्हें आना न था, 
हम सारी रात करवट बदलते रहे.



प्यार की कली सब के लिए खिलती नहीं, 
चाह कर भी हरेक एक चीज मिलती नहीं,
सच्चा प्यार किस्मत से मिलता है,
पर हर एक को ऐसी किस्मत मिलती नहीं.

आँख तो प्यार में दिल की ज़ुबान होती है,
सच्ची चाहत तो सदा बे-ज़ुबान होती है,
प्यार में दर्द भी मिले तो क्या घबराना,
सुना है दर्द से ही चाहत और जवान होती है.

जिंदगी बेच दी मैंने इसे पाने की खातिर

मुफलिसी जब बदनसीबी में बदलने लगी
और मोहब्बत मेरी बेबसी में बदलने लगी

तब प्यार भरे गीतें को नीलाम कर दिया
शायरी जब मेरी आवारगी में बदलने लगी.

निगाहे बदली मगर अहदे वफ़ा नहीं बदला
तूफानों में कभी हमने नाखुदी नहीं बदला

बहारे आई और आकर चली गयी ओ ग़ालिब
मेरे चमन से लेकिन दौरे खिज़ा नहीं बदला.

इतना भी न सताओ अपने चाहने वालो को

मोहब्बत से गम,गम से हम पेरशान है
लाखो हैं दीवाने तेरे,मगर हम ही बदनाम है

इतना भी न सताओ अपने चाहने वालो को
पागल दीवाने ही सही मगर फिर भी इंसान तो है.



खूबसूरती तो बहुत दी खुदा ने तुम्हे
मगर हमें तुम्हारी वफ़ा ना मिल सकी

बहुत आग दी हमने बुझते चिराग को
मगर मोहब्बत की शमा जल ना सकी.

गमो की गहराई में अगर छोड़ आते हमें

अगर मुझ पर ऐतबार किया होता
तो आपको जाने क्या दिया होता
गमो की गहराई में अगर छोड़ आते हमें
तो भरी महफ़िल में ना ज़हर पिया होता 

हमसे रूठ जाने की खता कब तक याद करोगे
हम मर जाएंगे तेरी याद में तो याद करोगे
फिर ना हम यहाँ लोट कर आएगें
रो रोकर मिलने की फरियाद करोगे

तुम मेरी जिन्दगी मेरी जीने कि वजह बन जाओ

मेरी एक खवाहिश है जो तुम हों,
मेरी एक चाहत है जो तुम हों,

एक ही मेरी दुआ एक ही मेरी फरियाद
बस एक ही मेरी मोहब्बत है जो तुम हों.

मेरी चाहते बढने लगी है,
मुझे तेरी जरूरत होने लगी है,

बस बाहों में आ जाओ मेरी
मुझे तुम से मोहब्बत होने लगी है.



तुम मेरी खुशी बन जाओ,
तुज मेरी हँसी बन जाओ,

हमारी तो चाहत ही यही है
तुम मेरी जिन्दगी मेरी जीने कि वजह बन जाओ.

तुझे सीने से लगाओं कैसे,
तुझे दिल में बसाओं कैसे,

मेरी हर साँस पर बस तेरा ही नाम है
तुझे ये बताओं तो बताओं कैसे.

Tuesday, October 25, 2016

उतर भी आओ कभी आसमाँ के ज़ीने से

वो चांदनी का बदन ख़ुशबुओं का साया है;
बहुत अज़ीज़ हमें है मगर पराया है;

उतर भी आओ कभी आसमाँ के ज़ीने से;
तुम्हें ख़ुदा ने हमारे लिये बनाया है.


हम उस से थोड़ी दूरी पर हमेशा रुक से जाते हैं;
न जाने उस से मिलने का इरादा कैसा लगता है;

मैं धीरे धीरे उन का दुश्मन-ए-जाँ बनता जाता हूँ;
वो आँखें कितनी क़ातिल हैं वो चेहरा कैसा लगता है.

अब हक़ीक़त नज़र आए तो उसे क्या समझूँ

किस को क़ातिल मैं कहूँ किस को मसीहा समझूँ;
सब यहाँ दोस्त ही बैठे हैं किसे क्या समझूँ.

वो भी क्या दिन थे कि हर वहम यकीं होता था;
अब हक़ीक़त नज़र आए तो उसे क्या समझूँ.


दिल जो टूटा तो कई हाथ दुआ को उठे;
ऐसे माहौल में अब किस को पराया समझूँ.

ज़ुल्म ये है कि है यक्ता तेरी बेगानारवी;
लुत्फ़ ये है कि मैं अब तक तुझे अपना समझूँ.

हसीनों ने हसीन बन कर गुनाह किया

हसीनों ने हसीन बन कर गुनाह किया;
औरों को तो क्या हमको भी तबाह किया;

पेश किया जब ग़ज़लों में हमने उनकी बेवफाई को;
औरों ने तो क्या उन्होंने भी वाह - वाह किया।


ज़रा साहिल पे आकर वो थोड़ा मुस्कुरा देती;
भंवर घबरा के खुद मुझ को किनारे पर लगा देता;

वो ना आती मगर इतना तो कह देती मैं आँऊगी;
सितारे, चाँद सारा आसमान राह में बिछा देता।

हम सिमटते गए उनमें और वो हमें भुलाते गए

दिल से रोये मगर होंठो से मुस्कुरा बेठे,
यूँ ही हम किसी से वफ़ा निभा बेठे,

वो हमे एक लम्हा न दे पाए अपने प्यार का,
और हम उनके लिये जिंदगी लुटा बेठे.



इश्क़ सभी को जीना सिखा देता है,
वफ़ा के नाम पर मरना सीखा देता है,

इश्क़ नहीं किया तो करके देखो,
ज़ालिम हर दर्द सहना सीखा देता है.

तेरी रूह से रूह तक का रिश्ता है मेरा

पलकों में आँसु और दिल में दर्द सोया है,

हँसने वालो को क्या पता, रोने वाला किस कदर रोया है.


ये तो बस वही जान सकता है मेरी तनहाई का आलम,


जिसने जिन्दगी में किसी को पाने से पहले खोया है.




तेरी धड़कन ही ज़िंदगी का किस्सा है मेरा,

तू ज़िंदगी का एक अहम् हिस्सा है मेरा.


मेरी मोहब्बत तुझसे, सिर्फ़ लफ्जों की नहीं है,


तेरी रूह से रूह तक का रिश्ता है मेरा.